Wednesday, July 7, 2010

किसी पक्षी का एक पंख के सहारे उड़ना नितांत असम्भव है





स्त्रियों की अवस्था में सुधार होने तक

विश्व के कल्याण का कोई मार्ग नहीं

किसी पक्षी का एक पंख के सहारे उड़ना नितांत असम्भव है


-स्वामी विवेकानन्द



मनुष्य का अनुमान

कभी भी उसकी त्रुटियों से नहीं लगाना चाहिए ;

त्रुटियाँ तो मानव की सामान्य दुर्बलताएं हैं,

महान सदगुण ही मनुष्य के अपने होते हैं


-स्वामी विवेकानन्द




Tuesday, July 6, 2010

ऐसा जिस स्त्री को प्रतीत होता है वह स्त्री धन्य है !




परमेश्वर का दुनिया के प्रति प्रेम ही माता रूप में प्रकट हुआ है,

ऐसा जिसे प्रतीत होता है वह पुरूष धन्य है !

परमेश्वर का पितृत्व ही पुरूष रूप में प्रकट हुआ है

ऐसा जिस स्त्री को प्रतीत होता है वह स्त्री धन्य है !

और माता-पिता केवल परमेश्वर स्वरूप ही हैं,

ऐसा जिन्हें प्रतीत होता है वे बच्चे भी धन्य हैं


-स्वामी
विवेकानन्द

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Monday, July 5, 2010

वह सचमुच ब्रह्म हो जाता है

जो सोचता है कि मैं जीव हूँ, वह जीव ही रहता है ; 

जो अपने को ब्रह्म मानता है वह सचमुच ब्रह्म हो जाता है  - 

जो जैसा सोचता है  वह वैसा ही बन जाता है . 

- रामकृष्ण परमहंस 



तुम जैसे विचारों  की दुनिया में विचरते हो 

उसमे तुम कभी न कभी  अपने जीवन को  मूर्त्तिमान देखोगे . 

- अज्ञात महापुरूष









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Sunday, July 4, 2010

क्या यह सोचना पागलपन नहीं है



बिलाशक  ऐसे बेशुमार  आदमी हैं जो अन्यायी, बेईमान, धोखेबाज़, 

जफ़ाकार, फ़रेबी,  झूठे और विश्वासघाती बन कर धनवान हुए हैं .  

क्या यह सोचना पागलपन नहीं है कि ऐसे आदमी सुखी हो सकते हैं ?  

क्या वे इस दौलत का अत्यल्पांश भी आनन्द से उपयोग कर सकते हैं ? 

क्या उनका अन्तरात्मा  उन्हें रात-दिन  

झिड़की, पीड़ा, संताप और यंत्रणा  नहीं देता  रहता होगा ?


-अज्ञात महापुरूष 


 

अपने अनुभव बिना सच मन लेना श्रद्धा नहीं है



श्रद्धा का अर्थ है  आत्मविश्वास 

और आत्मविश्वास का  अर्थ है ईश्वर पर विश्वास 


- महात्मा गांधी 




श्रद्धा के मानी  अन्धविश्वास नहीं है . 

किसी ग्रन्थ में कुछ लिखा हुआ  या  किसी आदमी  का कुछ  कहा हुआ  

अपने अनुभव बिना सच मन लेना श्रद्धा  नहीं है 

- स्वामी विवेकानन्द



Friday, July 2, 2010

वे बोलते ज़्यादा से ज़्यादा हैं

वाक्-शक्ति  नि:सन्देह  एक नियामत है .  

यह अन्य  नियामतों का अंश नहीं,  

बल्कि स्वयमेव एक निराली नियामत है . 


- तिरुवल्लुवर 



जिन्हें कहना कम से कम होता है 

वे  बोलते ज़्यादा से ज़्यादा हैं 


-प्रायर 








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Thursday, July 1, 2010

यही अपना पुरूषार्थ और यही अपना स्वराज्य है



हर
आदमी

एक ही निश्चित मार्ग को अंगीकार करने के बजाय

ख़ुद के स्वाभाव अनुसार स्वतंत्र रीति से

नया मार्ग निकाल कर पुरुषोत्तम हो सके

तभी यह कहा जा सकता है कि उसने सच्चा पुरूषार्थ किया


ईश्वर में अपने को तदगत करना

स्वयं उसको आत्मगत करके उसे सर्वत्र अनुभव करना

यही अपना पुरूषार्थ और यही अपना स्वराज्य है

- अरविन्द घोष