Monday, November 29, 2010

अरविन्दो का अनमोल विचार




अदृश्य नियति के विधान से

हमारी सबसे बड़ी बाधा ही

हमारा सबसे बड़ा योग बन जाती है


-अरविन्दो घोष


hasyakavi albela khatri, vichar arvindo ghosh ke, hasya kavi sammelan, hindi poetry, sahitya












Wednesday, November 24, 2010

जिसकी रचना इतनी सुन्दर, वो कितना सुन्दर होगा........




हमारी भूल ये है कि हम रचना के पीछे दौड़ते हैं, रचना को अपना बनाना

चाहते हैं ये जानते हुए भी कि ये रचना आज तक किसी एक की हुई है

और ही आगे भी होने वाली हैये धन, दौलत, मकान,दूकान,महल,माल,

रूप-लावण्य, माता-पिता, भाई-बन्धु ...सब तरह की रचना उस रचयिता

का खेल मात्र हैज़रा सोचिये ..यदि ये रचना किसी की हो पाती तो क्या

हमारे हिस्से में आती ? हमारे पूर्वज क्या अपने साथ नहीं ले गये होते

गठरी बांध के ?


संतमत कहता है रचना के पीछे नहीं, रचयिता के पीछे समय लगाओ

........वो रचयिता जो सदा से हमारा है और जिसे हम से कोई जुदा नहीं

कर सकतावो रचनाकार सबके पास है और सदा सदा से है



कबीर साहेब फरमाते हैं :

सब घट मेरा साईंयां, सूनी सेज कोय..........


लिहाज़ा हमें चाहिए कि हम रचना के मोह जाल से निकलें और रचनाकार

के आँचल में विश्राम पायें


-अलबेला खत्री



Friday, November 19, 2010

अचरज



विपत्ति सह लेने में अचरज नहीं,

अचरज है वैसी हालत में भी शान्त रहने में

- जुन्नुन


प्रस्तुति : अलबेला खत्री



Monday, November 1, 2010

मैं फिर से अमीर हो जाता हूँ




कभी-कभी मैं द्रव्यहीन हो जाता हूँ,

यहाँ तक कि मेरी हीनता बहुत बढ़ जाती है

परन्तु अपनी मर्यादा को स्थिर रखते ही

मैं फिर से अमीर हो जाता हूँ


-इब्न-अब्दुल-इल-असदी



Thursday, October 28, 2010

त्याग सूखी रोटी खाने में नहीं, आरज़ू को जीतने में है





त्याग यह नहीं है कि मोटे और सख्त कपड़े पहन लिए जायें

और सूखी रोटी खायी जाये

त्याग तो यह है

कि अपनी आरजू, इच्छा और ख्वाहिश को जीता जाये


- सूफ़ियान सौरी

hasyakavi,albela khatri,brahmkhatri,tikamchand varde,hindi kavita, big boss, laughter champion,surat  kalakar

Wednesday, August 11, 2010

प्रत्येक के जीवन में इतना दुःख और विषाद




अगर हम अपने शत्रुओं की गुप्त आत्म-कहानियां पढ़ें

तो हमें प्रत्येक के जीवन में इतना दुःख और विषाद

भरा हुआ मिलेगा कि फिर हमारे मन में

उनके लिए ज़रा भी शत्रुभाव नहीं रहेगा

उलटे करुणा प्रस्फुटित होगी


- अज्ञात महापुरूष



Monday, August 2, 2010

मैं अपनी स्वाभाविक करुणा से मनुष्य को उसकी इच्छा से भी विशेष देता हूँ

जब सत्कर्मी को असह्य कष्ट हो,

तो समझना चाहिए कि ईश्वर शीघ्र ही उस पर कृपा करने वाला है


- अज्ञात महापुरूष



ईश्वर ने कहा है -

मैं अपनी स्वाभाविक करुणा से

मनुष्य को उसकी इच्छा से भी विशेष देता हूँ


- सादिक



ईश्वर की कृपा के बिना

मनुष्य के प्रयत्न से कुछ नहीं मिल सकता


- बायजीद




















www.albelakhatri.com