धर्म और अध्यात्म के आलोक स्तम्भ
हास्यकवि अलबेला खत्री द्वारा रचित व संकलित भजन,स्तुतियाँ तथा महापुरूषों के अमृत वचन
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इन्तेकाम
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Sunday, July 11, 2010
बदला लेने से मनुष्य अपने शत्रु के समान हो जाता है
जो
बदला
लेने
की
सोचता
है
,
वह
अपने
ही
घाव
को
हरा
रखता
है
जो
अब
तक
कभी
का
भर
गया
होता
।
बदला
लेने
से
मनुष्य
अपने
शत्रु
के
समान
हो
जाता
है
,
न
लेने
से
उस
से
श्रेष्ठ
हो
जाता
है
-
बेकन
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