धर्म और अध्यात्म के आलोक स्तम्भ
हास्यकवि अलबेला खत्री द्वारा रचित व संकलित भजन,स्तुतियाँ तथा महापुरूषों के अमृत वचन
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उचित अनुचित चाणक्य
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Monday, November 16, 2009
कालकूट विष भी गले का आभूषण बन गया
अनुचित
वस्तु
बड़ों
को
उचित
हो
जाती
है
और
उचित
वस्तु
नीचों
को
दूषित
हो
जाती
है
।
जैसे
अमृत
से
राहू
की
मृत्यु
हुई
और
विषपान
से
भगवान्
शंकर
का
नाम
नीलकंठ
पड़ा
अर्थात
कालकूट
विष
भी
गले
का
आभूषण
बन
गया
।
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चाणक्य
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