धर्म और अध्यात्म के आलोक स्तम्भ
हास्यकवि अलबेला खत्री द्वारा रचित व संकलित भजन,स्तुतियाँ तथा महापुरूषों के अमृत वचन
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Saturday, January 16, 2010
समझ समझ का फेर...........
जो
धर्म
को
द्वितीय
वस्तु
समझता
है
वह
उसे
अवस्तु
समझता
है
।
जो
ईश्वर
को
दूसरा
स्थान
देता
है
वह
उसे
कोई
स्थान
नहीं
देता
-
रस्किन
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