हास्यकवि अलबेला खत्री द्वारा रचित व संकलित भजन,स्तुतियाँ तथा महापुरूषों के अमृत वचन
Saturday, May 22, 2010
यही अन्तर था दोनों में
दुर्योधन को
यज्ञ में सब ब्राह्मण
दुष्ट ही दुष्ट दिखाई दिए
और धर्मराज को
सब भले ही भले,
यही अंतर था दोनों में...........
- हरिभाऊ उपाध्याय
Thursday, May 20, 2010
दुनिया सबसे अच्छी रंगशाला है
यही कहा जा सकता है कि उसने बहुतों की बलि दे दी
हम
उपदेश
सुनते हैं मन भर, देते हैं टन भर
पर ग्रहण करते हैं कण भर
- अलजर
जो आदमी
बिना आप पूरा हुए
दूसरों को उपदेश देता है
वह बहुतों का गला काटता है;
पर जो आप पूरा होकर दूसरों को शिक्षा नहीं देता
उसके बारे में भी यही कहा जा सकता है
कि उसने बहुतों की बलि दे दी
- जापान
Tuesday, May 18, 2010
वरना वह उसका मतलब न समझेगा............
Monday, May 17, 2010
नेक काम भी गुप्त रह कर ही कारगर होते हैं
Sunday, May 16, 2010
वे लोग जिनके पास सिवाय तेरे सब कुछ है.....
मेरे प्रभो !
वे लोग जिनके पास सिवाय तेरे सब कुछ है,
उन लोगों पर हँसते हैं
जिनके पास
सिवाय तेरे कुछ नहीं है
- गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर
Wednesday, May 5, 2010
सत्य की बलि नहीं दी जा सकती
सत्य के लिए
सब कुछ त्यागा जा सकता है
लेकिन सत्य को
किसी भी चीज के लिए
नहीं छोड़ा जा सकता ।
सत्य की बलि
नहीं दी जा सकती
- स्वामी विवेकानन्द
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