त्याग यह नहीं है कि मोटे और सख्त कपड़े पहन लिए जायें
और सूखी रोटी खायी जाये ।
त्याग तो यह है
कि अपनी आरजू, इच्छा और ख्वाहिश को जीता जाये ।
- सूफ़ियान सौरी
अगर हम अपने शत्रुओं की गुप्त आत्म-कहानियां पढ़ें
तो हमें प्रत्येक के जीवन में इतना दुःख और विषाद
भरा हुआ मिलेगा कि फिर हमारे मन में
उनके लिए ज़रा भी शत्रुभाव नहीं रहेगा
उलटे करुणा प्रस्फुटित होगी
- अज्ञात महापुरूष
जब सत्कर्मी को असह्य कष्ट हो,
तो समझना चाहिए कि ईश्वर शीघ्र ही उस पर कृपा करने वाला है-
अज्ञात महापुरूषईश्वर ने कहा है -
मैं अपनी स्वाभाविक करुणा सेमनुष्य को उसकी इच्छा से भी विशेष देता हूँ-
सादिकईश्वर की कृपा के बिनामनुष्य के प्रयत्न से कुछ नहीं मिल सकता-
बायजीद
www.albelakhatri.com
हमारी ख़ुशियाँ वास्तव में कितनी कम हैं,
अफ़सोस है कि उनकी खातिर हम अपने चिरन्तन कल्याण को भी
खतरे में डाल देते हैं
-बेली
पापमय और फरेब से प्राप्त की गई ख़ुशियाँ
ज़हरीली रोटियों की तरह हैं, उनसे उस वक्त भूख भले ही मिट जाये,
मगर अन्त में उनसे मौत ही मिलती है
-तायरन एडवर्ड्स
जब तक कोई शख्स 'अल्लाह हो ! अल्लाह हो !
हे भगवान ! हे भगवान !' चिल्लाता है,
निश्चय जानो, उसे ईश्वर नहीं मिला,
क्योंकि जो उसे पा लेता है वह खामोश हो जाता है
-स्वामी रामकृष्ण परमहंस
कोई सांसारिक भय ज्ञानी मनुष्य के दिल को नहीं दहला सकता,
चाहे वह उसके कितने ही निकट पहुँच जाये ।
जैसे कोई तीर पत्थर की विशाल शिला को नहीं वेध सकता ।
-योग वशिष्ठ
जो मनुष्य मशहूर नहीं है, वह सुखी है ।
बढ़िया कुरता और कम्बल नहीं पहनता तो अच्छा करता है ।
ऐसा आदमी ही चिड़िया की तरह ऊपर आकाश में उड़ जाता है
और इस संसार के उजाड़ खण्ड का उल्लू नहीं बनता ।
-शब्सतरी