Wednesday, June 2, 2010

संतोष ही इन्सान का बेहतरीन खाना-खज़ाना है




सांप हवा खाकर ज़िन्दा रहते हैं

तब भी दुर्बल नहीं होते,

जंगली हाथी सूखी घास खाकर जीते हैं

मगर बलवान होते हैं,

साधु लोग कन्द-मूल फल खाकर अपना समय गुज़ारते हैं

परन्तु तेजस्वी होते हैं

अर्थात

संतोष ही इन्सान का बेहतरीन खाना-खज़ाना है


- अज्ञात महापुरुष





6 comments:

M VERMA said...

अज्ञात महापुरूष को नमन्

जी.के. अवधिया said...

अति सुन्दर विचार!

डॉ टी एस दराल said...

लाख टके की बात कही है ।
लेकिन संतोष होता बहुत कम को है ।

DR. ANWER JAMAL said...

हज़रत मुहम्मद साहब ने कहा है कि अल्गिना गिनन-नफ़स अर्थात सबसे बड़ा धन है संतोष .
आपकी क़लम को बोसा दिया जाना चाहिए .

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत ही उपयोगी और संग्रह करने योग्य विचार!

देव कुमार झा said...

खत्री साहब...
इस अज्ञात महापुरुष को शत शत प्रणाम...