Monday, December 6, 2010

मैं विश्व के महान तत्त्व का एक अंश हूँ




मनुष्य

तब तक अपनी पूर्ण शक्ति को प्राप्त नहीं कर सकता

जब तक

वह इस बात को मन, वचन और शरीर से न समझ ले

कि मैं विश्व के महान तत्त्व का एक अंश हूँ


-स्वेट मार्डेन


Sunday, December 5, 2010

संस्कृति





बड़ी से बड़ी बात को

सरल तरीके से कहना उच्च संस्कृति का प्रमाण है


-एमर्सन


Saturday, December 4, 2010

अनमोल वचन ईसा का



ख़ुशकिस्मत हैं वे जिनका दिल साफ़ है,

क्योंकि उन्हें परमात्मा के दर्शन ज़रूर होंगे


-ईसा

Friday, December 3, 2010

सुख लीजिये, सुखी रहिये...





वह सुखी है

जिसकी परिस्थितियां उसके मिजाज़ के अनुकूल है ;

लेकिन वह और भी आनन्द में है

जो अपने मिजाज़ को हर परिस्थिति के अनुकूल बना लेता है


-ह्यूम



Thursday, December 2, 2010

ये शाश्वत सिद्धान्त है धर्म का





जिसकी संगति में -

फिर वह व्यक्ति हो, समाज हो या संस्था हो -

अपूर्णता मालूम हो

वहां पूर्णता लाने का प्रयत्न करना अपना धर्म है ।

गुणों की अपेक्षा दोष बढ़ते हों तो

उसका त्याग-असहयोग-धर्म है ।

यह शाश्वत सिद्धान्त है

-महात्मा गांधी



gandhi,hasyakavi albela khatri,poetry,kavisammelan, sahitya,veerras kavi,rashtriya kavi,ojasvi kavi,manch sanchalak,shaashwat siddhant,no sex,no adult content

Tuesday, November 30, 2010

धर्म और साइंस पर पोप की दो टूक बात





जो ये कहते हैं कि साइंस और धर्म का विरोध है

वे या तो साइंस से वह कहलवाते हैं

जो उसने कभी नहीं कहा

या धर्म से

वह कहलवाते हैं

जो उसने कभी नहीं सिखाया


-पोप


swarnim gujarat,surat,vigyan,dharm,hasyakavi albela khatri ka hasyahungama,hindi sammelan, diwana, mastana













Monday, November 29, 2010

अरविन्दो का अनमोल विचार




अदृश्य नियति के विधान से

हमारी सबसे बड़ी बाधा ही

हमारा सबसे बड़ा योग बन जाती है


-अरविन्दो घोष


hasyakavi albela khatri, vichar arvindo ghosh ke, hasya kavi sammelan, hindi poetry, sahitya












Wednesday, November 24, 2010

जिसकी रचना इतनी सुन्दर, वो कितना सुन्दर होगा........




हमारी भूल ये है कि हम रचना के पीछे दौड़ते हैं, रचना को अपना बनाना

चाहते हैं ये जानते हुए भी कि ये रचना आज तक किसी एक की हुई है

और ही आगे भी होने वाली हैये धन, दौलत, मकान,दूकान,महल,माल,

रूप-लावण्य, माता-पिता, भाई-बन्धु ...सब तरह की रचना उस रचयिता

का खेल मात्र हैज़रा सोचिये ..यदि ये रचना किसी की हो पाती तो क्या

हमारे हिस्से में आती ? हमारे पूर्वज क्या अपने साथ नहीं ले गये होते

गठरी बांध के ?


संतमत कहता है रचना के पीछे नहीं, रचयिता के पीछे समय लगाओ

........वो रचयिता जो सदा से हमारा है और जिसे हम से कोई जुदा नहीं

कर सकतावो रचनाकार सबके पास है और सदा सदा से है



कबीर साहेब फरमाते हैं :

सब घट मेरा साईंयां, सूनी सेज कोय..........


लिहाज़ा हमें चाहिए कि हम रचना के मोह जाल से निकलें और रचनाकार

के आँचल में विश्राम पायें


-अलबेला खत्री



Friday, November 19, 2010

अचरज



विपत्ति सह लेने में अचरज नहीं,

अचरज है वैसी हालत में भी शान्त रहने में

- जुन्नुन


प्रस्तुति : अलबेला खत्री



Monday, November 1, 2010

मैं फिर से अमीर हो जाता हूँ




कभी-कभी मैं द्रव्यहीन हो जाता हूँ,

यहाँ तक कि मेरी हीनता बहुत बढ़ जाती है

परन्तु अपनी मर्यादा को स्थिर रखते ही

मैं फिर से अमीर हो जाता हूँ


-इब्न-अब्दुल-इल-असदी



Thursday, October 28, 2010

त्याग सूखी रोटी खाने में नहीं, आरज़ू को जीतने में है





त्याग यह नहीं है कि मोटे और सख्त कपड़े पहन लिए जायें

और सूखी रोटी खायी जाये

त्याग तो यह है

कि अपनी आरजू, इच्छा और ख्वाहिश को जीता जाये


- सूफ़ियान सौरी

hasyakavi,albela khatri,brahmkhatri,tikamchand varde,hindi kavita, big boss, laughter champion,surat  kalakar

Wednesday, August 11, 2010

प्रत्येक के जीवन में इतना दुःख और विषाद




अगर हम अपने शत्रुओं की गुप्त आत्म-कहानियां पढ़ें

तो हमें प्रत्येक के जीवन में इतना दुःख और विषाद

भरा हुआ मिलेगा कि फिर हमारे मन में

उनके लिए ज़रा भी शत्रुभाव नहीं रहेगा

उलटे करुणा प्रस्फुटित होगी


- अज्ञात महापुरूष



Monday, August 2, 2010

मैं अपनी स्वाभाविक करुणा से मनुष्य को उसकी इच्छा से भी विशेष देता हूँ

जब सत्कर्मी को असह्य कष्ट हो,

तो समझना चाहिए कि ईश्वर शीघ्र ही उस पर कृपा करने वाला है


- अज्ञात महापुरूष



ईश्वर ने कहा है -

मैं अपनी स्वाभाविक करुणा से

मनुष्य को उसकी इच्छा से भी विशेष देता हूँ


- सादिक



ईश्वर की कृपा के बिना

मनुष्य के प्रयत्न से कुछ नहीं मिल सकता


- बायजीद




















www.albelakhatri.com

Friday, July 23, 2010

भूख भले ही मिट जाये, मगर अन्त में उनसे मौत ही मिलती है




हमारी ख़ुशियाँ वास्तव में कितनी कम हैं,

अफ़सोस है कि उनकी खातिर हम अपने चिरन्तन कल्याण को भी

खतरे में डाल देते हैं

-बेली



पापमय और फरेब से प्राप्त की गई ख़ुशियाँ

ज़हरीली रोटियों की तरह हैं, उनसे उस वक्त भूख भले ही मिट जाये,

मगर अन्त में उनसे मौत ही मिलती है


-तायरन एडवर्ड्स



Wednesday, July 21, 2010

क्योंकि जो उसे पा लेता है वह खामोश हो जाता है




जब तक कोई शख्स 'अल्लाह हो ! अल्लाह हो !

हे भगवान ! हे भगवान !' चिल्लाता है,

निश्चय जानो, उसे ईश्वर नहीं मिला,

क्योंकि जो उसे पा लेता है वह खामोश हो जाता है


-स्वामी रामकृष्ण परमहंस



Tuesday, July 20, 2010

तीर पत्थर की विशाल शिला को नहीं वेध सकता



कोई सांसारिक भय ज्ञानी मनुष्य के दिल को नहीं दहला सकता,

चाहे वह उसके कितने ही निकट पहुँच जाये

जैसे कोई तीर पत्थर की विशाल शिला को नहीं वेध सकता

-योग वशिष्ठ



Monday, July 19, 2010

ऐसा आदमी ही चिड़िया की तरह ऊपर आकाश में उड़ जाता है





जो मनुष्य मशहूर नहीं है, वह सुखी है

बढ़िया कुरता और कम्बल नहीं पहनता तो अच्छा करता है

ऐसा आदमी ही चिड़िया की तरह ऊपर आकाश में उड़ जाता है

और इस संसार के उजाड़ खण्ड का उल्लू नहीं बनता


-शब्सतरी



Sunday, July 18, 2010

संयम अतिभोग से रोकता है



संयम और परिश्रम इन्सान के दो सर्वोत्तम चिकित्सक हैं

परिश्रम से भूख तेज़ होती है और संयम अतिभोग से रोकता है

-रूसो





डूबने वाले के प्रति सहानुभूति का मतलब उसके साथ डूबना नहीं है



उन पत्थर  के पशुओं पर लाहनत है, 

जो दूसरों के दुःख  को कोमलता से अपनाकर द्रवीभूत नहीं हो जाते 



-हिल 



डूबने वाले  के प्रति सहानुभूति  का मतलब उसके साथ डूबना नहीं है  

बल्कि ख़ुद तैर कर उसको  बचने का प्रयत्न करना है 



-विनोबा  भावे



Saturday, July 17, 2010

ईश्वर की ज्योति पापी को नहीं मिला करती

मैंने गुरू की सेवा में निवेदन किया

कि मेरी स्मरण-शक्ति बिगड़ गई, इस पर उन्होंने मुझे

यह उपदेश दिया कि पापों को छोड़ दे;

क्योंकि विद्या ईश्वर की ज्योति है

और ईश्वर की ज्योति पापी को नहीं मिला करती ।

- इमाम शाफ़ई






























Friday, July 16, 2010

मैं विश्व के महान तत्व का एक अंश हूँ







जितने दुःख, जितनी विपत्तियाँ हमें प्राप्त होती हैं,

उनका कारण यही है कि अनन्त ऐश्वर्य युक्त सर्वशक्तिमान ईश्वर

की ओर से हम भिन्नता का भाव रखते हैं


मनुष्य तब तक अपनी शक्ति को ठीक ठीक प्राप्त नहीं कर सकता

जब तक कि वह इस बात को मन, वचन और शरीर से समझ ले

कि मैं विश्व के महान तत्व का एक अंश हूँ


-
स्वेट मार्डेन












www.albelakhatri.com

Thursday, July 15, 2010

वह तुम्हें ईश्वर के सिंहासन तक पहुंचा देगी .




एक चीज़ को  हमेशा नज़र के सामने रखो - सत्य को ; 

अगर तुमने यह किया,

तो चाहे वह तुम्हें  लोगों की रायों से  अलग ले जाती  लगे, 

परन्तु लाज़िमी तौर से वह तुम्हें  ईश्वर के सिंहासन तक पहुंचा देगी . 

-होरेस मैन


 

Tuesday, July 13, 2010

छोटे से छोटे जानवर को भी मरने से कैसे बचाया जाये




नेक रास्ता कौन सा है ?

वही

जिसमें इस बात का ख्याल रखा जाता है कि

छोटे से छोटे जानवर को भी मरने से कैसे बचाया जाये

-तिरुवल्लुवर



Monday, July 12, 2010

गुण मनुष्य के वश में हैं ; प्रतिभा के वश में स्वयं मनुष्य होता है



वे  सत्य के सर्वोत्तम प्रेमी हैं  जो अपने प्रति ईमानदार हैं 

और जिसका वे स्वप्न  देखते हैं, 

उसे कर दिखाने का साहस रखते हैं 

गुण मनुष्य के वश में हैं ;  प्रतिभा के वश में स्वयं मनुष्य होता है


-लॉवेल



Sunday, July 11, 2010

बदला लेने से मनुष्य अपने शत्रु के समान हो जाता है




जो बदला लेने की सोचता है,

वह अपने ही घाव को हरा रखता है

जो अब तक कभी का भर गया होता

बदला लेने से मनुष्य अपने शत्रु के समान हो जाता है,

लेने से उस से श्रेष्ठ हो जाता है


-बेकन



www.albelakhatri.com






Saturday, July 10, 2010

झूठ झूठ में कितना अन्तर .....................




दो
अर्थों वाले शब्द लेकर

किसी विशेष शब्द पर ज़ोर दे कर

या आँख के इशारे से भी झूठ बोला जाता है

इस प्रकार का झूठ

स्पष्ट शब्दों में बोले गये झूठ से कई गुना बुरा है

-रस्किन



Friday, July 9, 2010

भीतर से तो वह सदा ईश्वर से मिलता रहता है




साधु पुरूष का लक्षण यह है कि

वह जिस किसी से भी मिलता है, बाहर से ही मिलता है

भीतर से तो वह सदा ईश्वर से मिलता रहता है


-अज्ञात महापुरूष




Wednesday, July 7, 2010

किसी पक्षी का एक पंख के सहारे उड़ना नितांत असम्भव है





स्त्रियों की अवस्था में सुधार होने तक

विश्व के कल्याण का कोई मार्ग नहीं

किसी पक्षी का एक पंख के सहारे उड़ना नितांत असम्भव है


-स्वामी विवेकानन्द



मनुष्य का अनुमान

कभी भी उसकी त्रुटियों से नहीं लगाना चाहिए ;

त्रुटियाँ तो मानव की सामान्य दुर्बलताएं हैं,

महान सदगुण ही मनुष्य के अपने होते हैं


-स्वामी विवेकानन्द




Tuesday, July 6, 2010

ऐसा जिस स्त्री को प्रतीत होता है वह स्त्री धन्य है !




परमेश्वर का दुनिया के प्रति प्रेम ही माता रूप में प्रकट हुआ है,

ऐसा जिसे प्रतीत होता है वह पुरूष धन्य है !

परमेश्वर का पितृत्व ही पुरूष रूप में प्रकट हुआ है

ऐसा जिस स्त्री को प्रतीत होता है वह स्त्री धन्य है !

और माता-पिता केवल परमेश्वर स्वरूप ही हैं,

ऐसा जिन्हें प्रतीत होता है वे बच्चे भी धन्य हैं


-स्वामी
विवेकानन्द

hindikavi,hasya kavi,hasyahungama, albelakhatri.com,sensex,free video, poem,india,football world cup, deshbhakti,matribhakti,pitribhakti,bhaki, sahitya,adhyatm,aatma,man,deh,sharir,parmatma,god,rab











www.albelakhatri.com

Monday, July 5, 2010

वह सचमुच ब्रह्म हो जाता है

जो सोचता है कि मैं जीव हूँ, वह जीव ही रहता है ; 

जो अपने को ब्रह्म मानता है वह सचमुच ब्रह्म हो जाता है  - 

जो जैसा सोचता है  वह वैसा ही बन जाता है . 

- रामकृष्ण परमहंस 



तुम जैसे विचारों  की दुनिया में विचरते हो 

उसमे तुम कभी न कभी  अपने जीवन को  मूर्त्तिमान देखोगे . 

- अज्ञात महापुरूष









www.albelakhatri.com

Sunday, July 4, 2010

क्या यह सोचना पागलपन नहीं है



बिलाशक  ऐसे बेशुमार  आदमी हैं जो अन्यायी, बेईमान, धोखेबाज़, 

जफ़ाकार, फ़रेबी,  झूठे और विश्वासघाती बन कर धनवान हुए हैं .  

क्या यह सोचना पागलपन नहीं है कि ऐसे आदमी सुखी हो सकते हैं ?  

क्या वे इस दौलत का अत्यल्पांश भी आनन्द से उपयोग कर सकते हैं ? 

क्या उनका अन्तरात्मा  उन्हें रात-दिन  

झिड़की, पीड़ा, संताप और यंत्रणा  नहीं देता  रहता होगा ?


-अज्ञात महापुरूष 


 

अपने अनुभव बिना सच मन लेना श्रद्धा नहीं है



श्रद्धा का अर्थ है  आत्मविश्वास 

और आत्मविश्वास का  अर्थ है ईश्वर पर विश्वास 


- महात्मा गांधी 




श्रद्धा के मानी  अन्धविश्वास नहीं है . 

किसी ग्रन्थ में कुछ लिखा हुआ  या  किसी आदमी  का कुछ  कहा हुआ  

अपने अनुभव बिना सच मन लेना श्रद्धा  नहीं है 

- स्वामी विवेकानन्द



Friday, July 2, 2010

वे बोलते ज़्यादा से ज़्यादा हैं

वाक्-शक्ति  नि:सन्देह  एक नियामत है .  

यह अन्य  नियामतों का अंश नहीं,  

बल्कि स्वयमेव एक निराली नियामत है . 


- तिरुवल्लुवर 



जिन्हें कहना कम से कम होता है 

वे  बोलते ज़्यादा से ज़्यादा हैं 


-प्रायर 








www.albelakhatri.com

Thursday, July 1, 2010

यही अपना पुरूषार्थ और यही अपना स्वराज्य है



हर
आदमी

एक ही निश्चित मार्ग को अंगीकार करने के बजाय

ख़ुद के स्वाभाव अनुसार स्वतंत्र रीति से

नया मार्ग निकाल कर पुरुषोत्तम हो सके

तभी यह कहा जा सकता है कि उसने सच्चा पुरूषार्थ किया


ईश्वर में अपने को तदगत करना

स्वयं उसको आत्मगत करके उसे सर्वत्र अनुभव करना

यही अपना पुरूषार्थ और यही अपना स्वराज्य है

- अरविन्द घोष



Wednesday, June 30, 2010

तेरी नज़र दूसरी किसी वस्तु को नहीं देखती




यदि तू ईश्वर के प्रेम में पागल होता तो वजू नहीं करता,

ज्ञानी होता तो दूसरे की स्त्री पर नज़र नहीं डालता

और जो ईश्वर-दर्शी होता तो

ईश्वर छोड़ कर

तेरी नज़र दूसरी किसी वस्तु को नहीं देखती


- अज्ञात महापुरुष



Monday, June 28, 2010

क्योंकि बहाना सुरक्षित झूठ है




बहाना झूठ से भी बदतर

और भयंकरतर चीज है

क्योंकि बहाना सुरक्षित झूठ है ।

- पोप



जैसे जिन घरों में सामग्री बहुत भरी रहती है

उनमे चूहे भरे हो सकते हैं,

उसी तरह जो लोग बहुत खाते हैं

वे रोगों से भरे होते हैं ।


डायोजिनीज़




ज़्यादा खाने वालों के लिए

उनका चौका उनका मन्दिर है,

रसोइया उनका पुरोहित,

थाली उनकी बलिवेदी

और पेट उनका परमात्मा है ।


बक


hindi kavi, hindi kavita, albela khatri, swarnim gujarat, free video, nude girl, adult content, arz kiya hai, salaam namaste haste haste, poetry, sahitya, hasyahungama, facebook,  google,












www.albelakhatri.com




Monday, June 21, 2010

तो मैं हूँ ही किसलिए ?




अगर मैं अपने लिए नहीं हूँ,

तो मेरे लिए कौन होगा ?

और अगर मैं सिर्फ़ अपने लिए हूँ,

तो मैं हूँ ही किसलिए ?

- अज्ञात महापुरुष



मैं कौन हूँ ?

ईश्वर का दिया खाने वाला

और शैतान का हुक्म बजाने वाला

- मलिक दिनार



www.albelakhatri.com



Sunday, June 20, 2010

सात असम्भव बातें.............

कौवे में पवित्रता,

जुआरी में सत्य,

सर्प में सहनशीलता,

स्त्री में कामशान्ति,

नामर्द में धीरज,

शराबी में तत्त्वचिन्ता

और राजा में मैत्री

किसने देखी या सुनी है ?


-पंचतंत्र

Saturday, June 19, 2010

दीपक की भांति अन्तःकरण भी प्रत्यक्ष करता है



जिस प्रकार दीपक

दूसरी वस्तुओं को प्रकाशित करता है

और अपने स्वरूप को भी प्रकाशित करता है,

उसी प्रकार अन्तःकरण

दूसरी वस्तुओं को प्रत्यक्ष करता

और अपने को भी प्रत्यक्ष करता है


-सम्पूर्णानंद




Friday, June 18, 2010

जीव को व्यर्थ मत मारिये




सब प्राणियों का खून एक है,

चाहे वह बकरी हो,

गाय हो या अपनी सन्तान

पीर पैगम्बर और औलिया -

सब एक एक दिन मर जायेंगे

इसलिए अपने शरीर का पालन करने के लिए

जीव को व्यर्थ मत मारिये


-श्री गुरू नानकदेव जी



Wednesday, June 16, 2010

सत्य को जानिये...............



सत्य पर अनेक विद्वानों ने अपने विचार कहे हैं

देखिये इस लिंक पर


http://albelakhari।blogspot।com/2010/06/blog-post_17.html

Saturday, June 12, 2010

आज़ादी जिसका नाम है उसमे यह सब शामिल है -





आज़ादी
जिसका नाम है

उसमे


यह
सब शामिल है -
मिलने-जुलने की आज़ादी,
रुपये -पैसे की आज़ादी,
घर-गृहस्थी की आज़ादी,
सरकार बनाने की आज़ादी,
सोचने-विचारने की आज़ादी
और
आत्मिक आज़ादी

एक भी हो, इन में से तो
आज़ादी,
आज़ादी नहीं,
ग़ुलामी है


-
महात्मा भगवानदीन












http://albelakhari.blogspot.com/2010/06/blog-post_4274.html

http://hindihasyakavisammelan.blogspot.com/2010/06/blog-post_12.html

http://www.albelakhatri.com/

Thursday, June 10, 2010

जैसे अर्ध-जागृत बालक अपनी माँ को देखता है



जब तक कामिनी और कंचन का मोह नहीं छूट जाता,

ईश्वर के दर्शन नहीं हो सकते



ईश्वर के दर्शन

तब होते हैं

जब मन शान्त हो जाता है


-रामकृष्ण परमहंस



मैंने तुझे उसी तरह देखा है,

जिस तरह कि अर्ध-जागृत बालक

प्रातः काल के धुंधलेपन में अपनी माँ को देखता है

और थोड़ा सा मुस्कुराता है,

फिर सो जाता है


- रवीन्द्रनाथ टैगोर


hindi kavi, hasyakavi, kavi sammelan, albela khatri,  hasyakavi albelakhatri, poet, taigor, ishwar, brahmkshtriya.com, brahamkshtriya samachar, bhumika kaku, sexy video, free sex, nude, dance program, sen sex










www.albelakhatri.com

Wednesday, June 2, 2010

संतोष ही इन्सान का बेहतरीन खाना-खज़ाना है




सांप हवा खाकर ज़िन्दा रहते हैं

तब भी दुर्बल नहीं होते,

जंगली हाथी सूखी घास खाकर जीते हैं

मगर बलवान होते हैं,

साधु लोग कन्द-मूल फल खाकर अपना समय गुज़ारते हैं

परन्तु तेजस्वी होते हैं

अर्थात

संतोष ही इन्सान का बेहतरीन खाना-खज़ाना है


- अज्ञात महापुरुष





Friday, May 28, 2010

लक्ष्मी किन को छोड़ देती है ? इन पाँचों को........





मैले कपड़े पहनने वालों को,

गन्दे दाँत वालों को,

अधिक भोजन करने वालों को,

निष्ठुर बोलने वालों को

और सूर्योदय के बाद सोने वालों को

लक्ष्मी छोड़ देती है,

चाहे वह विष्णु ही क्यों हो

- अज्ञात




Thursday, May 27, 2010

तो तुझे इन्सान नहीं कहा जा सकता



अगर तू दूसरों की तकलीफ़ नहीं समझता

तो तुझे इन्सान नहीं कहा जा सकता

- शेख सादी



दूसरों को सताने के बराबर कोई नीचता नहीं है

- रामायण


Tuesday, May 25, 2010

पहले तो अकेला न था, लेकिन तूने आकर अकेला कर दिया





ईश्वर ने

इस संसार में जिसे अकेला बनाया है,

धन-वैभव नहीं दिया है,

सुख में प्रसन्न होने वाला और दुःख में गले लगा कर

रोने वाला साथी नहीं दिया है,

संसार के शब्दों में जिसे उसने 'दुखिया' बनाया है,

उसके जीवन में

उसने एक महान अभिप्राय भर दिया है ।



- रामकृष्ण परमहंस




एक साधू से किसी ने पूछा

तू अकेला क्यों बैठा है ?


साधू ने जवाब दिया कि पहले तो अकेला न था,

मालिक ध्यान में साथ था

लेकिन अब तूने आकर अकेला कर दिया ।


- अज्ञात सन्त पुरूष



hindi,hasya,kavi,sammelan,albela,khatri,poet,sensex,money,baba,ramkrishna,paramhans, india, surat,gujarat,swarnim,










www.albelakhatri.com




Monday, May 24, 2010

यदि वयस्क लोग उपदेशों पर स्वयं अमल करें





यदि
वयस्क लोग

उन उपदेशों पर स्वयं अमल करें

जो वे बच्चों को देते हैं,

तो दुनिया

अगले सोमवार को ही स्वर्ग तुल्य हो जाये


आर -किंग



Sunday, May 23, 2010

मनुष्यों से प्रेम करना अहिंसा नहीं है, यह तो व्यवहार है




द्वेष का कारण हुए बगैर कोई द्वेष नहीं करता ;

इसीलिए किसी ने द्वेष का कारण जुटाया हो तो भी

उससे द्वेष न करके, प्रेम करें ।

उस पर दया करके सेवा करना ही अहिंसा है ।

मनुष्यों से प्रेम करना अहिंसा नहीं है, यह तो व्यवहार है

-महात्मा गांधी


Saturday, May 22, 2010

यही अन्तर था दोनों में



दुर्योधन को

यज्ञ में सब ब्राह्मण

दुष्ट ही दुष्ट दिखाई दिए

और धर्मराज को

सब भले ही भले,

यही अंतर था दोनों में...........


- हरिभाऊ उपाध्याय

Thursday, May 20, 2010

दुनिया सबसे अच्छी रंगशाला है


बाहरी एकान्त

वास्तविक एकान्त नहीं

मन में चिन्ता

और शंका का प्रवेश हो,

वही सच्चा एकान्त है


- आविस




एकान्त

अच्छी पाठशाला है

लेकिन दुनिया

सबसे अच्छी रंगशाला है


- जे टेलर




एकान्त

ज्ञानी के लिए स्वर्ग है

और

मूर्ख के लिए क़ैद खाना


- शम्स तबरेज़



hidi hasyakavi albela khatri albelakhatri.com hindi kavita poetry kavisammelan













www.albelakhatri.com

यही कहा जा सकता है कि उसने बहुतों की बलि दे दी




हम

उपदेश

सुनते हैं मन भर, देते हैं टन भर

पर ग्रहण करते हैं कण भर


- अलजर





जो आदमी

बिना आप पूरा हुए

दूसरों को उपदेश देता है

वह बहुतों का गला काटता है;

पर जो आप पूरा होकर दूसरों को शिक्षा नहीं देता

उसके बारे में भी यही कहा जा सकता है

कि उसने बहुतों की बलि दे दी



- जापान

Tuesday, May 18, 2010

वरना वह उसका मतलब न समझेगा............



जो कुछ कहना है

उसको जहाँ तक हो सके, संक्षेप में कहो;

वरना

पढ़ने वाला

उसको छोड़ता चला जाएगा ;

और जहाँ तक हो सके सादा लफ़्ज़ों में कहो

वरना

वह उसका मतलब समझेगा


- रस्किन

hindi hasyakavi albela khatri albelakhatri hasyakavialbela  hasyasamrat albela khatri laughterking poet poetry



















www.hasyakavita.com

Monday, May 17, 2010

नेक काम भी गुप्त रह कर ही कारगर होते हैं




शहद
की मक्खियाँ

सिर्फ़ अँधेरे में काम करती हैं ;

विचार

सिर्फ़ खामोशी में काम करते हैं;

नेक काम भी

गुप्त रह कर ही कारगर होते हैं

अपने दायें हाथ को मालूम पड़ने दे

कि तेरा बायाँ हाथ क्या करता है


-
कार्लाइल
















www.albelakhatri.com

Sunday, May 16, 2010

वे लोग जिनके पास सिवाय तेरे सब कुछ है.....




मेरे प्रभो !

वे लोग जिनके पास सिवाय तेरे सब कुछ है,

उन लोगों पर हँसते हैं

जिनके पास

सिवाय तेरे कुछ नहीं है


- गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर



Wednesday, May 5, 2010

सत्य की बलि नहीं दी जा सकती




सत्य के लिए


सब कुछ त्यागा जा सकता है


लेकिन सत्य को


किसी भी चीज के लिए


नहीं छोड़ा जा सकता ।


सत्य की बलि


नहीं दी जा सकती



- स्वामी विवेकानन्द


Monday, March 8, 2010

मनुष्य क्या है ?



प्रत्येक मनुष्य एक बर्बाद परमात्मा है

-
एमरसन
















www.albelakhatri.com

Tuesday, February 23, 2010

उन्हें रात में नींद नहीं आती




जिनका हृदय

वैर या द्वेष की आग में जलता है

उन्हें रात में नींद नहीं आती


- महात्मा विदुर

Tuesday, February 16, 2010

गर्व करना सबसे बड़ा अज्ञान


अपनी विद्वता पर

गर्व करना

सबसे बड़ा अज्ञान है


- महावीर स्वामी

Monday, February 8, 2010

सत्य ज़्यादा कीमती है



समय कीमती है

पर सत्य उससे भी ज़्यादा कीमती है


- डिजरायली




















www.albelakhatri.com

Saturday, February 6, 2010

कहानी की तरह, ज़िन्दगी में भी यह देखा जाये



नेकी का बदला न देना क्रूरता है

और उसका

बदी में जवाब देना पिशाचता है ।

कहानी की तरह,

ज़िन्दगी में भी यह देखा जाये

कि वह

कितनी अच्छी है,

न कि कितनी लम्बी है


- सेनेका















www.albelakhatri.com




Friday, February 5, 2010

तब उसका कुछ मूल्य हो जाता है


जब व्यक्ति में


अन्तर्युद्ध शुरू हो जाता है,


तब उसका


कुछ मूल्य हो जाता है



- ब्राउनिंग






www.albelakhatri.com

Thursday, February 4, 2010

उदार चित्त वाले



"
यह मेरा है, यह दूसरे का"


ऐसा संकीर्ण ह्रदय वाले समझते हैं


उदार चित्त वाले तो


सारे संसार को


अपने
कुटुम्ब सा समझते हैं



- नारायण पण्डित


Wednesday, February 3, 2010

गुरू नानकदेव जी ने कहा ..........



यदि तू

मस्तिष्क को

शान्त रख सकता है

तो तू विश्व विजयी होगा


- गुरुनानकदेव

Tuesday, February 2, 2010

दूसरों के सहारे


जो दूसरों के सहारे रहेगा


उसका


कभी कभी सरेआम अपमान होगा



- जेम्स एलन




Monday, February 1, 2010

महावीर स्वामी के अमृत वचन




जो प्राणियों की हिंसा करता है,

दूसरों से कांपता है

या हिंसा करने वालों का अनुमोदन करता है,

वह संसार में

अपने लिए वैर बढ़ाता है


- महावीर स्वामी



तो प्रार्थना और तपस्या छोड़ देनी चाहिए



जब हवा चलने लगे तो पंखा छोड़ देना चाहिए

जब ईश्वर की कृपा-दृष्टि होने लगे

तो प्रार्थना और तपस्या

छोड़ देनी चाहिए


- रामकृष्ण परमहंस


Saturday, January 30, 2010

प्रेम के लिए द्वार खुले हैं




जो दूसरों पर

उपकार जताने का

इच्छुक है,

वह द्वार खटखटाता है


जिसके हृदय में

प्रेम है,

उसके लिए द्वार खुले हैं


- रवीन्द्रनाथ टैगोर



Friday, January 29, 2010

प्रार्थना कोई यांत्रिक वस्तु नहीं है




अहंकार को शून्य करने में

प्रार्थना

मदद दे सकती है

प्रार्थना कोई यांत्रिक वस्तु नहीं है,

वह हृदय की क्रिया है

भगवान की प्रार्थना में

सारे भेदों को भूल जाने का

अभ्यास हो जाता है


- आचार्य विनोबा भावे