Friday, July 2, 2010

वे बोलते ज़्यादा से ज़्यादा हैं

वाक्-शक्ति  नि:सन्देह  एक नियामत है .  

यह अन्य  नियामतों का अंश नहीं,  

बल्कि स्वयमेव एक निराली नियामत है . 


- तिरुवल्लुवर 



जिन्हें कहना कम से कम होता है 

वे  बोलते ज़्यादा से ज़्यादा हैं 


-प्रायर 








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1 comment:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

उनमें से एक हम भी तो होंगे!