Thursday, May 20, 2010

यही कहा जा सकता है कि उसने बहुतों की बलि दे दी




हम

उपदेश

सुनते हैं मन भर, देते हैं टन भर

पर ग्रहण करते हैं कण भर


- अलजर





जो आदमी

बिना आप पूरा हुए

दूसरों को उपदेश देता है

वह बहुतों का गला काटता है;

पर जो आप पूरा होकर दूसरों को शिक्षा नहीं देता

उसके बारे में भी यही कहा जा सकता है

कि उसने बहुतों की बलि दे दी



- जापान

3 comments:

honesty project democracy said...

बिलकुल सही कहा आपने इन्सान को जमीनी स्तर पर कुछ करना भी चाहिए,सिर्फ उपदेश सुनने और पढने से कुछ नहीं होता है / / विचारणीय प्रस्तुती / हम चाहते हैं की इंसानियत की मुहीम में आप भी अपना योगदान दें / पढ़ें इस पोस्ट को और हर संभव अपनी तरफ से प्रयास करें http://honestyprojectrealdemocracy.blogspot.com/2010/05/blog-post_20.html

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

उपदेशों की सुन्दर सूक्तियाँ पढ़वाने के लिए आभार!

DR. ANWER JAMAL said...

एक बार फिर आप ने वह कहा जो अटल सत्य है ।