Sunday, November 8, 2009

ज्ञान घमण्डी हो जाए तो अज्ञान से ज़्यादा ख़तरनाक.....



ज्ञान
जब इतना घमण्डी बन जाए कि वह रो सके,

इतना गम्भीर बन जाए कि वह हँस सके

और इतना आत्म केन्द्रित बन जाए कि

अपने सिवा और किसी की चिन्ता करे ,

तो वह ज्ञान

अज्ञान से भी ज़्यादा ख़तरनाक होता है



- खलील जिब्रान

2 comments:

Babli said...

आपने बिल्कुल सही कहा है ! मैं आपकी बातों से पूरी तरह सहमत हूँ! ज्ञान घमंडी हो जाए तो सचमुच बहुत ही खतरनाक साबित होता है!

Dr. kavita 'kiran' (poetess) said...

bahut achha albelaji.bilkul sahi farmate hain zibran sahab.ye baat sabhi saraswati ke upaskon ko yad rakhni chahiye warna gyan ko agyan me parivartit hote der nahi lagti.