Monday, November 16, 2009

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कहा मछली से सीखो....




यदि



स्वदेशाभिमान सीखना है


तो


मछली से सीखो ...


जो


स्वदेश (पानी ) के लिए


तड़प - तड़प कर


अपनी जान दे देती है



- नेताजी सुभाष चंद्र बोस




5 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

प्रेरणादायक पोस्ट!
नेता जी को नमन!

Udan Tashtari said...

शानदार!!

एस.के.राय said...

अलबेला खत्री जी ! आपने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के मछली वाली बात याद करवा कर बहुत उपकृत किया हैं , काश ! स्वदेश के लिए अपनी जान तड़प -तड़प कर दे देने की बात से यदि आज के नेता और देश के लोग कुछ सिख सकते .........आप नेताजी पर लिखे और खुब लिखे ,हो सकता हैं कि आपके लिखने से लोगों को कुछ प्रेरणा मिले । जयहिन्द ।

SACCHAI said...

" kum alfaz aur badi baat kahena koi aapse sikhe sir ..aapne to kamal ki baat ki hai ..aaj ke is dour me aapki baat kisi ke muh per karara tamacha hai ....aur vo kisike aur koi nahi hamare NETA hai ...bahut hi badhiya sir "

" aapko is post ke mai badhai nahi dunag kyu ki is post ke liye sayad mere paas BADHAI KUM pad jaye "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

श्याम सखा 'श्याम' said...

और
सहन करना
सीखना है
तो सीखो धरती से
या फ़िर औरत से
ज्ररूरी नही वह औरत
तुम्हारी मां बहन या बेटी हो
हो सकती है
वह तुम्हारी पत्नी भी