Thursday, December 10, 2009

धैर्य के साथ ख़ूबी समझने की राह देखें -काका कालेलकर




जो बात हमें जंच जाय,


उसको हम स्वीकार करें,


जो जँचे


उसके बारे में किसी से झगड़ा करें


हम धैर्य के साथ


उसकी ख़ूबी


समझने की राह देखें



-काका कालेलकर



2 comments:

जी.के. अवधिया said...

बहुत सुन्दर!

धीरज धरम मित्र अरु नारी आपद काल परखिये चारी

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

100 पैसे सही है जी!