Tuesday, December 15, 2009

मुफ़्त में नहीं पुरूषार्थ से............




जिसे


निज गौरव


का भान रहता है,


वह


किसी चीज को


मुफ़्त


पा जाने की बनिस्बत


उसे


अपने


पुरूषार्थ


से प्राप्त करता है



-स्वामी रामतीर्थ



# lauuhter ke phatke with albela khatri

17 dec. 10.00 P.M. on STAR ONE




4 comments:

निर्मला कपिला said...

बहुत सुन्दर धन्यवाद्

जी.के. अवधिया said...

अति सुन्दर!

इसे पढ़ कर रहीम जी का दोहा याद आ रहा हैः

आब गई आदर गया नैनन गया सनेह।
ये तीनों तब ही गये जबहिं कहा कछु देय॥

परमजीत बाली said...

बहुत सुन्दर!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

कर्म प्रधान विश्व रचि राखा!