Sunday, December 20, 2009

सबसे पवित्र धर्म




अभागा है


वह


जो संसार के


सबसे पवित्र धर्म


कृतज्ञता को


भूल


जाता है



- जयशंकर प्रसाद



4 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

सहमत.

Rekhaa Prahalad said...

Aabhaar

जी.के. अवधिया said...

बहुत सुन्दर विचार!

और लगता है कि आज के जमाने में सभी अभागे हैं।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

सत्य वचन!